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NEW STUDY :जानिए...क्यों मोटे लोगों को मौत का खतरा 10 गुना ज्यादा

नई दिल्ली. मोटापे से डायबिटीज, हार्ट, किडनी जैसी बीमारियों की आशंका बढ़ती है। मोटापाग्रस्त लोगों के लिए भी कोरोना ज्यादा घातक हो सकता है। इसको लेकर कई स्टडीज भी आ चुकी हैं। अब वल्र्ड ओबेसिटी फेडरेशन ने रिपोर्ट जारी किया है। रिपोर्ट के अनुसार उन देशों में 10 गुना ज्यादा मौतें हुई हैं जहां मोटे लोगों की संख्या ज्यादा है।

25 में से 22 लाख मौतें
वल्र्ड ओबेसिटी फेडरेशन की रिपोर्ट के अनुसार ब्रिटेन, अमरीका व इटली जैसे देशों में मौतों की दर ज्यादा है। इन देशों में 50 फीसदी से अधिक वयस्क आबादी मोटापाग्रस्त है।
25 से ज्यादा बीएमआइ खतरनाक
कोरोना से मौतों में सबसे बड़ा कारक उम्र है, लेकिन अधिक वजन दूसरे स्थान पर है। कोरोना से जुड़ी मौत की दर उन देशों में 10 गुना ज्यादा रही, जहां आधा से ज्यादा वयस्कों का बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआइ) 25 से ज्यादा है।
ब्रिटेन चौथे, अमरीका 8वें स्थान पर
उन देशों में जहां आधे से अधिक वयस्क आबादी मोटापे वाली थी उनमें मौतों में बेल्जियम पहले, स्लोवेनिया दूसरे, ब्रिटेन तीसरे, इटली पांचवें, पुर्तगाल छठें और अमरीका 8वें स्थान पर है।

आइसीयू में मोटे लोग ज्यादा
ब्रिटेन में 64 फीसदी युवा मोटापे से ग्रस्त हैं या उनका वजन लंबाई के अनुसार तय मानक से ज्यादा है।
ब्रिटेन
20 फीसदी मरीज सामान्य वजन के आइसीयू में भर्ती हुए
32 फीसदी मरीज अधिक वजन वाले आइसीयू में भर्ती हुए
48 फीसदी मोटापा ग्रस्त मरीज गंभीर हालत में आइसीयू में

अमरीका
68 फीसदी अधिक वजन व मोटापाग्रस्त हैं युवा
12 फीसदी मरीज अधिक वजन वाले आइसीयू में
24 फीसदी मरीज अधिक वजन वाले आइसीयू में
64 फीसदी मोटापाग्रस्त मरीज आइसीयू में भर्ती थे

यह है प्रमुख कारण
मोटे लोगों का मेटाबॉलिज्म असामान्य होने से लेकर शारीरिक प्रक्रिया में बाधा आती है। इसीलिए संक्रमित मरीज की स्थिति जल्दी गंभीर हो जाती है।
- सांस लेने की क्षमता पहले से प्रभावित होती
- सांस लेने की क्षमता ज्यादा प्रभावित होती है
- मोटे लोगों में डायबिटीज, हार्ट, सांस की दिक्कत

ऐसे समझें
बॉडी मास इंडेक्स जानने के लिए किलोग्राम में वजन को मीटर में लंबाई के वर्ग से भाग देते हैं।
- 25 से 29.9 बीएमआइ वाले व्यस्क का वजन ज्यादा
- 30 से 39.9 बीएमआइ वाले व्यस्क मोटापाग्रस्त मानते



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