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AYURVEDA: मेद से बढ़ता मोटापा, त्रिफला चूर्ण से करें मालिश

आयुर्वेद के अनुसार जो व्यायाम नहीं करते और ज्यादा मधुर खाते हैं तो उनके शरीर में मेद (वसा), कफ और वात बढ़ता है। इन विकारों के चलते व्यक्ति को अधिक भूख लगती है। ज्यादा खाते हंै और वजन बढ़ता है। ऐसे लोगों को पसीना ज्यादा आता और उसमें से दुर्गंध भी होता है। मोटापा बढऩे से कई तरह के रोग भी होते हैं।
अ धिक वजनी लोग सप्ताह में 3-4 बार त्रिफला पाउडर से पूरे शरीर पर मालिश करें। जहां चर्बी ज्यादा है वहां मालिश थोड़ी अधिक करें। इस प्रक्रिया को उद्ववर्तन कहते हैं। इससे शरीर में गर्माहट होती और चर्बी पिघलने लगती है।
ऐसे लोगों को उपवास करने से बचना चाहिए। उपवास से वजन घटता है लेकिन उसके बाद ज्यादा खाना खाने से अचानक से अधिक वजन बढ़ जाता है।
मोटे लोगों को गुनगुना पानी ही पीना चाहिए। ठंडा पानी मेटाबॉलिज्म को सुस्त करता है। इससे पाचन क्रिया धीमी हो जाती है। भोजन पचने की जगह चर्बी में बदलने लगता है।
ये औषधियां भी हैं अधिक उपयोगी
ऐसे लोगों को मोटे अनाज के साथ रागी, जौ, मूंग की दाल, परवल ज्यादा खाना चाहिए। जठराग्नि को बढ़ाने वाले भोजन जैसे अदरक, पपीता, करेला, जीरा, सहजन, पालक, चौलाई के अलावा पत्तेदार और हरी सब्जियां अधिक खानी चाहिए। व्यायाम रोज करें। गुडुची, नागरमोथा, विडंग, सूंठी, मेदोत्तर, गुग्गुल, वृक्षाम्ल आदि का उपयोग डॉक्टरी सलाह से करें। गुनगुने पानी में शहद मिलाकर ले सकते हैं।
डॉ. अजय साहू, आयुर्वेद विशेषज्ञ, राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान



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