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ऑक्सीजन की कमी वजह से इस्पात उत्पादन हुआ प्रभावित

मुंबई। सरकार की ओर से उद्योग या गैर-चिकित्सकीय उद्देश्य के लिए लिक्विड ऑक्सीजन इस्तेमाल को प्रतिबंधित किए जाने से घरेलू सेकंडरी इस्पात क्षेत्र प्रभावित हुआ है। इस्पात क्षेत्र का घरेलू सालाना उत्पादन में करीब 50 % का योगदान है। एकीकृत कंपनियों को चालू वित्त वर्ष में कुल इस्पात उत्पादन 8-10 प्रतिशत घटने की आशंका है।

अधिकतर कारोबारियों का कहना है कि हमने ऑक्सीजन की गैर-उपलब्धता की वजह से अपना संयंत्र बंद कर दिया है और हमें उत्पादन में हर महीने 20,000 टन इस्पात का नुकसान हो रहा है। हम नहीं जानते कि हम कब अपनी इकाई पुन: चालू कर पाएंगे, क्योंकि ऑक्सीजन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

सभी उत्पादक प्रभावित नहीं: देश का घरेलू इस्पात उत्पादन वित्त वर्ष 2021 में 8.56 करोड़ टन था, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 10.3% कम है। खपत भी 9.9त्न तक घटकर 8.469 करोड़ टन रह गई थी। हालांकि सेकंडरी उत्पादक प्रभावित नहीं हुए हैं।

उत्पादन प्रभावित होने की आशंका -
टाटा स्टील, जिंदल स्टील एंड पावर, जेएसडब्ल्यू स्टील, सरकार के स्वामित्व वाली सेल और एएम-एनएस इंडिया उन एकीकृत प्राथमिक इस्पात उत्पादकों में शामिल हैं, जो ऑक्सीजन चिकित्सकीय इस्तेमाल के लिए पहले ही स्थानांतरित कर चुकी हैं।

उपलब्ध नहीं है अनुपात -
इंस्टीट्यूट ऑफ स्टील डवलपमेंट एंड ग्रोथ के महासचिव पीके सेन के अनुसार, सेकंडरी इस्पात क्षेत्र असंगठित और अव्यवस्थित है, इसलिए इनकी इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस (ईएएसी) और इंडक्शन आर्क फर्नेस का अनुपात उपलब्ध नहीं है।

कमजोर मांग से आपूर्ति प्रभावित नहीं-
2000 टन इस्पात का नुकसान हो रहा है हर महीने में
8-10 % उत्पादन घटने की आशंका है कंपनियों को
10.3 % उत्पादन कम होगा पिछले साल के मुकाबले
50% योगदान है इस्पात क्षेत्र का घरेलू उत्पादन में
9.9% तक की कमी आई है खपत में भी इस साल



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